मानसिक रूप से अक्षम महिला का अपहरण कर बलात्कार करने वाले को 10 साल की सजा
संवाददाता : नितिन गुजराल

मुंबई, मुंबई की एक विशेष सत्र अदालत ने मलाड इलाके के 37 वर्षीय मजदूर को वर्ष 2016 के एक जघन्य अपराध में दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने मानसिक रूप से विकलांग महिला का अपहरण कर पांच दिनों तक उसके साथ बार-बार बलात्कार किया था। अदालत ने आरोपी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और जुर्माने की राशि में से 25,000 रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की दी गई सहमति कानूनी रूप से अमान्य होती है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता की मानसिक स्थिति का फायदा उठाया और जानबूझकर उसके विरोध न करने की स्थिति का लाभ लिया।
यह मामला नवंबर 2016 का है। पीड़िता की मां नकली आभूषण बनाने का काम करती थीं, जबकि पिता चौकीदार थे। 3 नवंबर 2016 को दोपहर करीब 2 बजे मां ने बेटी को काम से जुड़ी सामग्री लाने भेजा था। जब वह घर नहीं लौटी तो परिवार ने तलाश की और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
पीड़िता 8 नवंबर को घर लौटी और मां को बताया कि बाहर निकलते ही आरोपी उससे मिला, उसे ऑटो रिक्शा में बैठाकर अज्ञात जगह ले गया और एक घर में बंद कर पांच दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद बलात्कार का मामला दर्ज हुआ और 12 नवंबर 2016 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। मामला मालवानी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को अपहरण और बलात्कार के आरोपों में दोषी पाया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में ही था, इसलिए पहले से काटी गई सजा को वर्तमान सजा से समायोजित किया जाएगा।
यह फैसला समाज में कमजोर वर्ग की महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है और न्याय व्यवस्था की सख्ती को दर्शाता है।




