
जागरुक मुंबई न्यूज ।

मुंबई, दादर स्थित प्रसिद्ध ‘कबूतरखाना’ में सोमवार को उस वक्त अराजकता फैल गई जब जैन समुदाय के सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान जबरन कबूतरों के भोजन स्थल (दाना स्थल) को खुलवाया और मौके पर लगे सुरक्षा कवच को भी तोड़ दिया। यह घटनाक्रम जैन समाज द्वारा धार्मिक भावनाओं को आहत किए जाने के विरोध में आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अचानक उग्र रूप धारण कर गया।जैन समुदाय का कहना है कि कबूतरखाना जैसी जगहों पर कबूतरों को दाना डालना हिंसा का समर्थन है, क्योंकि इससे पक्षियों के बीच झगड़े और अनावश्यक जान-माल की हानि होती है, जो उनके ‘अहिंसा’ के सिद्धांतों के खिलाफ है। यही कारण है कि वे वर्षों से इन स्थलों के संचालन पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान भारी भीड़ ने वहां मौजूद बैरिकेड्स और सुरक्षात्मक ढांचे को तोड़ दिया। स्थानीय प्रशासन की ओर से लगाए गए कवर को हटाकर दाना स्थल को जबरन खोला गया। पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद भीड़ ने स्थिति पर नियंत्रण खो दिया, जिससे थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक यूज़र ने लिखा:
“ये सही है… लेकिन क्या हम गड्ढों, ट्रैफिक, जल निकासी जैसी असल समस्याओं के खिलाफ कभी इस तरह एकजुट होते हैं? हमारे पास हर रोज़ की समस्याएं हैं, फिर भी इस तरह का जुनून सिर्फ धार्मिक मुद्दों पर क्यों दिखाई देता है?”
स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई को नियमों का उल्लंघन बताया है और कुछ लोगों के खिलाफ शांति भंग करने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। नगर निगम अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कबूतरखाना की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और धार्मिक भावनाओं व पशु कल्याण दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा। दादर कबूतरखाना पर हुआ यह विरोध एक बार फिर मुंबई में धार्मिक आस्था, सार्वजनिक संरचना और प्रशासनिक संतुलन के बीच टकराव को उजागर करता है। जबकि समाज में धार्मिक भावनाओं के लिए जगह है, नागरिक अधिकार और ज़िम्मेदार प्रदर्शन की सीमाओं को लांघना चिंता का विषय है।




