मुंबई: गोवंडी में अपराध और नशे का बोलबाला,
कमिश्नर और सुरक्षा एजेंसियों से लगाई मदद की गुहार

मुंबई: गोवंडी में अपराध और नशे का बोलबाला, नागरिकों ने पुलिस कमिश्नर और सुरक्षा एजेंसियों से लगाई मदद की गुहार
मुंबई | क्राइम डेस्क मुंबई का एम-ईस्ट वार्ड (गोवंडी, मानखुर्द, शिवाजी नगर) इन दिनों गंभीर आपराधिक गतिविधियों और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की चपेट में है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए ‘गोवंडी नागरिक कल्याण मंच’ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती से मुलाकात की और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
प्रमुख चिंताएं: नशा, अवैध व्यापार और सुरक्षा में चूक
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर के साथ-साथ केंद्रीय गृह सचिव, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। निवासियों का आरोप है कि:
इलाके में NDPS के तहत नशीले पदार्थों का प्रसार और अवैध गुटखा व्यापार चरम पर है।
FIR दर्ज करने में कथित रूप से देरी या चूक की जा रही है।
घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में पुलिस संसाधनों की भारी कमी है।
हिंसक घटनाओं से दहला इलाका
ज्ञापन में हालिया कुछ खौफनाक घटनाओं का जिक्र कर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं:
शूटआउट: फरवरी 2026 में कमला रमन नगर में 19 वर्षीय शिफा शेख की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।
चाकूबाजी: अप्रैल 2026 में 35 वर्षीय मोहम्मद आरिफ की उनके घर के बाहर चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जब उन्होंने हंगामा कर रहे गिरोह को रोकने की कोशिश की थी।
नाबालिगों का शोषण: हाल ही में ‘बाबू गुरु मां’ नामक आरोपी की गिरफ्तारी हुई, जिसने एक 17 वर्षीय लड़के का अपहरण कर उसे भीख मांगने के रैकेट और यौन शोषण में धकेल दिया था।
“हमने रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है। पुलिस आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि स्थानीय DCP को इस संबंध में कड़े निर्देश दे दिए गए हैं।” > — नफीस अंसारी, सदस्य, नागरिक प्रतिनिधिमंडल
नागरिकों की मुख्य मांगें
गोवंडी के नागरिक समूह ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
30 दिनों के भीतर कार्रवाई: प्रशासन से एक समयबद्ध ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ (Action Taken Report) मांगी गई है।
संपत्ति का ऑडिट: आपराधिक गिरोहों से जब्त की गई संपत्तियों का वित्तीय ऑडिट हो और उस धन का उपयोग नशामुक्ति केंद्रों के लिए किया जाए।
विशेष अभियान: क्षेत्र में नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बड़ा एन्फोर्समेंट ड्राइव चलाया जाए।
‘जीवन के अधिकार’ की रक्षा हो
स्थानीय नेताओं ने जोर दिया है कि संविधान द्वारा प्रदत्त “जीवन के अधिकार” के तहत निवासियों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि वे डरने के बजाय औपचारिक शिकायतों के माध्यम से जवाबदेही तय करने में मदद करें।




