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अपहरण के बाद हत्या कर जंगल में फेंकी थी लाश

ठाणे: 12 साल बाद खुला कत्ल का राज

ठाणे: 12 साल बाद खुला कत्ल का राज; अपहरण के बाद हत्या कर जंगल में फेंकी थी लाश

ठाणे: कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है। ठाणे पुलिस ने 12 साल पुराने एक अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है। साल 2014 में जिस युवक के अपहरण की गुत्थी अनसुलझी थी, असल में उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। ठाणे क्राइम ब्रांच (यूनिट-3, कल्याण) ने इस मामले में तीन आरोपियों को दबोच लिया है।

क्या था मामला?  डोंबिवली के दावडी इलाके में रहने वाला करण अरविंद बागुल (23) साल 2014 में अचानक लापता हो गया था। मानपाडा पुलिस स्टेशन में उसके अपहरण का मामला दर्ज था, लेकिन सालों तक पुलिस के हाथ खाली रहे। हाल ही में क्राइम ब्रांच को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने चंद्रकांत बालाराम गायकवाड़ (39) को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद इस खौफनाक साजिश की परतें खुलती चली गईं।

हत्या की वजह: जमीन का विवाद : पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरी वारदात जमीन के सौदे में हुए पैसों के विवाद का नतीजा थी।

तारीख: 4 अक्टूबर 2014

मुख्य साजिशकर्ता: सुरेंद्र पांडुरंग पाटिल (55)

वारदात: सुरेंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर करण का अपहरण किया और उसे दावडी स्थित एक ऑफिस में ले गए। वहाँ लोखंडी रॉड से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी गई।

सबूत मिटाने की कोशिश हत्या के बाद आरोपी गायकवाड़ और सुरेश गोपाल देगावत उर्फ ‘छोटू’ ने शव को ठिकाने लगाने में मुख्य आरोपी की मदद की। उन्होंने करण की लाश को कार में लादा और मुरबाड तालुका के बारवी बांध के पास घने जंगलों में फेंक दिया। उस वक्त पुलिस को एक अज्ञात शव मिला था, जिसकी पहचान अब जाकर करण बागुल के रूप में हुई है।

पुलिस की कार्रवाई : मुख्य आरोपी सुरेंद्र पाटिल एक शातिर अपराधी है, जिस पर पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस ने अब इस मामले में हत्या (धारा 302), सबूत मिटाने (धारा 201) और साजिश (धारा 34) के तहत केस दर्ज किया है।

कोर्ट का फैसला: पकड़े गए तीनों आरोपियों को अदालत ने 2 मई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

यह बड़ी कामयाबी ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) पंजाबराव उगले और उनकी टीम के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच यूनिट-3 ने हासिल की है।

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