
इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर… कानून की आड़ में ब्लैकमेलिंग का धंधा करने वालों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है!
एक ऐसी महिला…
जिसने कानून को अपना हथियार बना लिया था। जिसने एक, दो या तीन नहीं… बल्कि पूरे 10 अलग-अलग पुरुषों पर दुष्कर्म, छेड़छाड़ और घरेलू हिंसा के मुकदमे ठोक रखे थे! लेकिन कानून की आंख पर पट्टी हो सकती है, हाई कोर्ट की नहीं!
कोर्ट का हथौड़ा और महिला द्वारा दर्ज मुकदमों की लिस्ट सामने आ गई है,
जी हां, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस शातिर पैटर्न को पकड़ते हुए आरोपी मनोज धनवड़े के खिलाफ दर्ज रेप की FIR को जड़ से खारिज (Quash) कर दिया
है। जस्टिस रंजीतसिंहा राजा भोंसले ने मामले की सुनवाई करते हुए इस पर इतनी सख्त टिप्पणी की है, जिसे सुनकर कानून का मजाक उड़ाने वालों की रूह कांप जाएगी।
कोर्ट ने सीधे शब्दों में कहा— “यह निजी फायदे के लिए, कानून की प्रक्रिया का घोर और दुर्भावनापूर्ण दुरुपयोग है!” अदालत ने साफ कर दिया कि शादी का हर टूटा हुआ वादा दुष्कर्म नहीं होता।
कोर्ट ने DGP महाराष्ट्र को आदेश महिला के सभी फिर मामले की जानकारी दे, बात सिर्फ FIR खारिज होने तक नहीं रुकी है। हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के डीजीपी (DGP) को ऑन-कैमरा और ऑन-रिकॉर्ड आदेश जारी किया है:
पहला आदेश: इस महिला की पूरी ‘हिस्ट्री’ और सभी 10 मुकदमों की लिस्ट राज्य के हर पुलिस स्टेशन को भेजी जाए।
दूसरा आदेश: भविष्य में यह महिला किसी भी पुरुष के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचे, तो पुलिस आंख मूंदकर तुरंत FIR दर्ज नहीं करेगी! पहले मामले की डीप ‘प्रारंभिक जांच’ होगी, उसके बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
यह कोर्ट का एक सराहनीय कदम है…
शायद इस महिला की पुरुषों पर अत्याचार करने पर लगाम लगेगी…..
जय हिन्द……



