
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच (यूनिट-7) ने एक बेहद पेचीदा और पांच साल पुराने अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। साल 2020 में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड को इतनी चालाकी से अंजाम दिया गया था कि पुलिस को यह एक महज सड़क हादसा लगे।
लेकिन कानून के लंबे हाथों ने आखिरकार पांच साल बाद कड़ियों को जोड़कर इस मर्डर मिस्ट्री से पर्दा उठा ही दिया। ₹1.5 लाख का विवाद और अपनों का ही धोखा
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी खौफनाक वारदात के पीछे महज 1.5 लाख रुपये का लेन-देन था।
मृतक की पहचान अशफाक मुलानी के रूप में हुई है। साल 2020 में पैसों के इसी मामूली विवाद को लेकर अशफाक का उसके अपने ही दोस्तों से झगड़ा हुआ था। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि जिन दोस्तों पर अशफाक भरोसा करता था, उन्हीं ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। आरोपियों ने लकड़ी के भारी डंडों से पीट-पीटकर अशफाक को मौत के घाट उतार दिया। फोंडा घाट की गहरी खाई में रची ‘एक्सीडेंट’ की साजिश
हत्या करने के बाद आरोपियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाश और सबूतों को ठिकाने लगाने की थी। इसके लिए उन्होंने एक शातिर स्क्रिप्ट तैयार की आरोपियों ने अशफाक के शव और उसकी मोटरसाइकिल को मुंबई से दूर सिंधुदुर्ग जिले के फोंडा घाट ले गए।
वहां उन्होंने शव और बाइक को एक बेहद गहरी खाई में नीचे फेंक दिया। आरोपियों की योजना यह थी कि अगर कभी शव मिले भी, तो पुलिस और दुनिया इसे एक आम पहाड़ी सड़क दुर्घटना (रोड एक्सीडेंट) समझकर केस बंद कर दे। ऐसे खुली ‘परफेक्ट मर्डर’ की पोल आरोपियों को लगा था कि पांच साल बीत जाने के बाद अब वे पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन क्राइम ब्रांच की यूनिट-7 को इस मामले में एक गुप्त इनपुट मिला। जब पुलिस ने कड़ाई से जांच शुरू की और तकनीकी सबूतों व संदिग्धों के बयानों को खंगाला, तो कहानी की परतें खुलती चली गईं।
“आरोपियों ने वारदात को पूरी तरह एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की थी। लेकिन हमारी टीम ने पांच साल पुराने इस मामले की कड़ियों को बेहद बारीकी से जोड़ा, जिसके बाद यह साफ हो गया कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर था।” क्राइम ब्रांच ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुख्य साजिशकर्ताओं समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने या सबूत मिटाने में क्या किसी और ने भी उनकी मदद की थी। कोर्ट ने आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेज दिया है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।




